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वो सर्द सुबह और कटनी स्टेशन

वो सर्द सुबह और कटनी स्टेशन दोस्तों ये बात एक सर्द सुबह की है और अनोखा आभास है शायद बदल रहा है या हम और ज़्यादा खुले विचारों के हो रहे हैं | मुझे कटनी मुरवारा स्टेशन से बिलासपुर आना था और मेरी ट्रेन सुबह ५ : ३० पेर थी | यकीन माने जनवरी की ठंड थी और बहुत कड़ाके की ठंड पढ़ रही थी उस समय | चूँकि मुझे जबलपुर से आ कर ट्रेन पकड़ना था सो मैं किसी तरह स्टेशन पहुच गया | कटनी मुरवारा कटनी शहर का एक छोटा सा स्टेशन है ज्यदा आवाजाहि नही है वहाँ से , केवल कुछ ही रूट की गाड़ियाँ रुकती है पर अब विस्तार हो रहा है | ठंड और सर्द हवाओं से बचने के लिए मै कुछ माकूल जगह ढूंड रहा था और पहुँच गया वेटिंग रूम | वहाँ का वेटिंग रूम एक छोटा सा कमरा है और कुछ कुर्सिया लोहे की पड़ी हैं | चुपचाप बैठ कर इंतजार करने लगा ट्रेन का | चारो तरफ कोहरा था , ठंड अपने शाबाब पर थी ना कोई चाय वाला ना कोई यात्री | सहसा मेरी नज़र सामने से आ रही एक युवती पर पड...

एक हसीन शाम २४/०९(रचित संदीप के नाम)

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एक हसीन शाम २४/०९(रचित संदीप के नाम) दोस्तो ऐसा नही है कि कोई पहली बार है कि मैं यह कहूँ की आज की शाम हसीन थी पर शायद यह बुरे के बाद अच्छे का आना था सो कहना पड़ता है एक हसीन शाम   जैसा कि लिखा एक हसीन शाम २४ / ०९ ( रचित , संदीप के नाम से ही आप लोगो को आभास हो गया होगा कि यह केवल शाम का ज़िक्र नही है )| सच भी है | बात सुरू हुई करीब २३ / ०९ की रात को मेरे मित्र की तबीयत अचानक खराब हुई और सारी ज़िम्मेदारी मुझ पर आ गई , रात भर एमर्जेन्सी में बीता वो भी खड़े खड़े | पेशे से सिविल इंजिनियर हूँ सो काम भी ऐसा है आजकल की थक जाता हूँ | थकु भी क्यूँ ना . उम्र भी तो ४२ के पार आ गई है | खैर रविवार यानी २४ / ०९ की दोपहर तक अविराम थकान और दीमाकी कसरत के बाद मैने हथियार डाल दिए | घर आ कर नहा के सोने के अलावा कोई चारा ना था मेरे पास , पर नियति को मेरी आखों में नीद ना भेजना ठीक लगा सो केवल लेट कर आराम ही कर सका | शाम करीब ४ : ००...

मेरी भूटान यात्रा (अलग अंदाज मे)

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मेरी भूटान यात्रा ( अलग अंदाज मे) काफ़ी उठापटक के बाद हम लोगो के लए वह दिन आया दिनाक १३ . ०८ . २०१७ जिस दिन हमे अपनी यात्रा सुरू करनी थी | जैसा वीदित था बिलासपुर से सुबह ४ : ०० निकलना था पर ऐसा हो ना सका | रात मे काफ़ी भागदौड़ मनमनुवल सब चला | आरोप प्रत्यारोप भी खूब हुए | खैर सब के बाद हम सभी लगभग रिवर व्यू निर्धारित स्थान पर मिले | वहाँ से सुरू हुआ जस्न और मिलने मिलाने का सिलसिला | सच बता रहा हूँ भावुक हो गया लोगो से मिल के , वो सम्मान पा के , अच्छा लगा | सायद ये हम सभी पर विस्वास था उन लोगो का हम पर या एक भरोसा जो वो पूरा होना देखना चाहते थे | तो दोस्तो इस तरह हमारी यात्रा का आरंभ हुआ और हम सात लोग निकल पड़े अपनी लेट इट रेन यात्रा पर | हमे विदा करने आय हुए लोगो से बिछड़ने का दर्द क्या होता है एहसास हुआ वासुदेव आँगन ढाबा पे , मन भारी था पर कही एक खुशी भी थी यात्रा की | पर यह कोई आन्तिम विदाई तो थी नही फिर मिलने का र...